Wish Poem – ख्वाहिशें बहुत हैं – Poem on Hope and Wish

Wish Poem – Poem on Hope and Wish

Wish Poem

नादान दिल धड़कने की ख्वाहिशें बहुत हैं
मोहब्बत के सफ़र में आज़माइशें बहुत हैं
अपना उसे बनाने का इक रोज़ वक़्त आएगा
उम्मीद के दामन में अभी गुंज़ाइशें बहुत हैं
हर दौर में ख़ुदा सा कोई चढ़ता सलीब पर
सियासत में साज़िशों की पैदाइशें बहुत हैं
फैली हुई चादर से भी रह जाते हैं पैर बाहर
ज़िन्दगी में ख़्वाब की फरमाइशें बहुत हैं