Women Empowerment Poems – प्रथम स्त्री – Women Poem

Women Empowerment Poems – Poem on Women in Hindi

Women Empowerment Poems

सृष्टि के प्रारम्भ में आया था जब,
वह, प्रथम पुरुष, स्वायंभुव मनु,
तब ही तो प्रकट हुई थी “शतरूपा”, प्रथम स्त्री,
सिर्फ और सिर्फ, उसके लिये।

उस प्रथम पुरुष के,
जीवन को बनाने पूर्ण।
साथ मिल सृजन की,
नव सृष्टि सारी,
किया जीवन विस्तार,
सह प्रसव पीड़ा।

देती रही उसका साथ,
हर जटिल परिस्थिति में,
प्रथम कदम से अब तक,
बन पार्वती, शिव की,
रही गुफाओं और कंदराओं में।

कभी बन सीता, राम की, भटकी वन वन।
तो कभी बनी मीरा, मोहन की फिरी नगर नगर बन जोगन।
भोगा दंड, बिन अपराध, बन अहल्या, गौतम की।
किया प्रेम, सह षड़यंत्र, बन आम्रपाली, अजातशत्रु को,
तब भी,न जाने कब, क्यों,
कैसे होता रहा भंग, मोह उसका,
कभी त्यागा, किया शापित,
हारा जुए में, तो कभी छोड़ा,
प्रसव काल मे भटकने को।

वह प्रथम स्त्री तो आरम्भ से ही रही समर्पित, उसके लिये,
बदलता रहा रुप, रंग, स्वभाव अपना, वो प्रथम पुरुष,
तब से अब तक निरंतर प्रकृति प्रवृति अनुसार।

बन गया, कब वो,
प्रेम प्रतीक कृष्ण से “बुद्ध”,
छोड़ गया, उस प्रथम स्त्री को,
बना “राधा “से “यशोधरा,
हां, वही सृष्टी का प्रथम पुरुष,
भोगती आई है आरंभ से यही,
भोगेगी अंतिम तक अंतिम स्री भी।


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