Women Poem – कविता में स्त्री – Poem of Beauty of a Woman

Women Poem – Poem of Beauty of a Woman

Women Poem

कवि नज़र में केले के पेड़
युग्म शीर्षासन करते हैं
तब जाकर स्त्री की
टांगों का रूप धरते हैं
वक्ष के उभार में तुम्हारी
कविता इतनी खो गई
स्त्री ह्रदय को देखने से
पहले ही बे सुध हो गई
कविता सदा तत्पर रही
भरने को उसको बाँहों में
क्यूँ झाँकती कविता नहीं
कवि, स्त्री की आहों में
कुल मिलाकर स्त्री
कविता में केवल अंग है

स्त्री के अस्तित्त्व पर कवि,
कविता तुम्हारी व्यंग्य है
तुम्हारी उपमाओं ने किया
स्त्रीत्व का ही ख़ात्मा
कवि तुम्हें दिखती नहीं क्यों
स्त्री की घायल आत्मा
उसके मन को बेड़ियों में
क़ैद किया कौन है
कविता कहो कविता तुम्हारी
यहाँ पर क्यों मौन है
अब बदलना ही पड़ेगा
सौंदर्य के प्रतिमान को
शीर्ष पर रखना पड़ेगा
कवि,स्त्री के सम्मान को


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